ऊर्जा स्रोत के रूप में जीवाश्म ईंधनों का उपयोग करने के लाभ तथा हानियों को बताइए ।
जीवाश्मीय ईंधनों से ऊर्जा प्राप्त होने वाली के लाभ व कमियाँ दोनो हैं । पहले हम लाभों की बात करते हैं -
- जीवाश्म ईंधनों से ऊर्जा का उत्पादन करना तकनीकी दृष्टि से आसान है व इसकी लागत भी कम होती है ।
- जीवाश्म ईंधनों का कैलोरी मान बहुत अधिक होता है । जीवाश्म ईंधनों से एक ही क्षेत्र में बहुत बड़ी मात्रा में विद्युत का उत्पादन किया जा सकता है ।
- जीवाश्म ईंधनों , जैसे कि तेल व गैस आदि को ऊर्जा संयंत्रों तक पाइप लाइन के द्वारा आसानी से पहुँचाया जा सकता है ।
- जो विद्युत संयंत्र ( पॉवर प्लांट ) गैसों का उपयोग करते हैं वे बहुत दक्ष होते है ।
- जीवाश्म ईंधनों का उपयोग करने वाले विद्युत संयंत्रों का निर्माण प्रौद्योगिकी की दृष्टि से अपेक्षाकृत सरल होता है तथा इनका निर्माण किसी भी क्षेत्र में किया जा सकता है ।
अगर हम जीवाश्म ईंधनों के उपयोग से होने वाली कमियों या हानियों की बात करें तो हम पाएँगे कि -
- जीवाश्म ईंधनों को ऊर्जा के स्रोतों के रूप में उपयोग करने पर सबसे बड़ी हानि इनसे उत्पन्न प्रदूषण है । जीवाश्म ईंधनों के दहन की प्रक्रिया में बहुत अधिक मात्रा में विषैली गैसें ( कोयलों का उपयोग करने पर उड़न राख ) बनती हैं जो कि पर्यावरण को संदूषित करती हैं । इन गैसों में कार्बन डाइऑक्साइड भी होती है जो कि सूर्य की किरणों को रोक लेती हैं और ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती है । कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा कोयले के जलने पर सल्फर डाइऑक्साइड भी बनती है जो कि अम्लीय वर्षा का कारण बन सकती है ।
- जीवाश्म ईंधनों की आपूर्ति सीमित है और इनकी बहुत जल्दी पुनःपूर्ति नहीं की सकती । जिस दर से आज इनका उपयोग किया जा रहा है , इनके भंडार जल्दी ही खत्म हो जाएँगे ।
- कोयला समेत अन्य जीवाश्म ईंधनों को प्राप्त करने की प्रक्रिया में बहुत बड़े भू - भागों का विनाश होता है जिससे उन भू - भागों में पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने का खतरा उत्पन्न हो जाता है । जीवाश्म ईंधनों , जिनमें कोयला भी शामिल है , को जमीन के अन्दर से निकालना बहुत कठिन कार्य है और इसे सबसे खतरनाक कामों में गिना जाता है । कई बार इससे खदानों में काम करने वाले लोगों की जान भी चली जाती है ।
- प्राकृतिक गैसों का उपयोग करने पर वातावरण में एक अप्रिय सी गंध फैल जाती है ।
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