एक नामांकित चित्र की सहायता से मेरु - रज्जु की आंतरिक संरचना का वर्णन कीजिए । इसके कार्य भी बताइए ।
मेरु - रज्जु ( Spiral Cord ) - मेरुरज्जु पूर्णरूपेण केंद्रीय तंत्रिका तंत्र का हिस्सा है । यह मेडुला ऑब्लांगैटा से विस्तृत होकर ( फैलकर ) मेरुदण्ड की लगभग पूरी लंबाई तक नीचे की ओर जाती है । मेरु - रज्जु मेरुदण्ड के भीतर केंद्रीय नाल में अवस्थित होता है । चित्र 23.7 मेरु– रज्जु की आंतरिक संरचना दर्शाता है । मेरुरज्जु में धूसर तथा श्वेत द्रव्य की व्यवस्था मस्तिष्क से उल्टी होती है । धूसर द्रव्य , जिसमें कि प्रेरक तंत्रिका कोशिकाओं के कोशिका - काय होते है , वह अंदर की ओर जबकि श्वेत द्रव्य इसके बाहरी ओर होता है । मस्तिष्क की ओर जा रहे तथा मस्तिष्क से आ रहे एक्सॉन श्वेत द्रव्य में लंबाई में जाते हुए एक छोर से दूसरे छोर तक पार हो जाते हैं । मध्य में एक छोटी केंद्रीय नाल होती है जो मेरुरज्जु की पूरी लंबाई में जाती हुई मस्तिष्क की गुहाओं तक होती है । यह केंद्रीय नाल मस्तिष्क मेरु तरल ( सेरिब्रोस्पाइनल फ्ल्यूड ) से भरी होती है जो कि एक आघातरोधक गद्दी की तरह कार्य करता है । यह तरल भोज्य पदार्थों , अपशिष्ट पदार्थों , श्वसनी गैस ( O , एवं O , ) के तंत्रिका – कोशिकाओं के साथ आदान - प्रदान के लिए एक माध्यम का कार्य करता है ।

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