जीवाश्म ईंधन क्या होते हैं ? इनका निर्माण कैसे होता है ? जीवाश्म ईंधन उपयोग करने के तीन लाभ व तीन कमियाँ बताइए ।
जीवाश्म ईंधन क्या होते हैं ? इनका निर्माण कैसे होता है ? जीवाश्म ईंधन उपयोग करने के तीन लाभ व तीन कमियाँ बताइए ।
जीवाश्म ईंधन प्राकृतिक ऊर्जा स्रोत हैं जो दबे हुए कार्बनिक पदार्थों के अपघटन जैसी प्रक्रियाओं द्वारा बनते हैं। पदार्थ समय के साथ सतह के नीचे गहरे दब जाते हैं और लाखों वर्षों तक पृथ्वी की परतों में गर्मी और दबाव के संपर्क में रहते हैं।
जीवाश्म ईंधन में मुख्य रूप से कार्बन युक्त ईंधन जैसे कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस शामिल होते हैं। जीवाश्म ईंधन का उपयोग गांवों में हीटिंग स्टोव से लेकर बिजली प्लांट तक के लिए किया जाता है जो लाखों लोगों के लिए पर्याप्त बिजली पैदा करते हैं।
जीवाश्म ईंधन का निर्माण
जीवाश्म ईंधन प्राकृतिक प्रक्रियाओं जैसे मरे और दबे हुए जीवों के सड़ने या अपघटन से बनने वाले ईंधन हैं। जैसे-जैसे मरे हुए पेड़ पौधे और जानवर पृथ्वी की गहराई में दबने लगती है, वहा गर्मी और दबाव बढ़ती जाती है।
जैसे-जैसे गर्मी बढ़ती है, जीवाश्म के अणु टूटने लगते हैं। शुरुआती में अणुओं के टूटने से भी ईंधन मिलता है लेकिन इनके पास कोयले और पेट्रोलियम की तुलना में कम ऊर्जा होती है।
लाखों वर्षों के लिए भूमि में रहने के बाद यह जीवाश्म ईंधन में बदल जाते हैं। प्लैंकटन प्राकृतिक गैस और तेल में टूट हो जाता है, जबकि पौधे कोयला बन जाते हैं। आज, मनुष्य इन संसाधनों को कोयला खनन और तेल और गैस के कुओं की ड्रिलिंग के माध्यम से निकालते हैं।
उनकी मांग अधिक जाती है क्योंकि इनमें अधिक ऊर्जा होती है, और जब इन्हे जलाया जाता है, तो जीवाश्म ईंधन बिजली प्रदान करते हैं। साथ ही साथ इनमें रासायनिक उद्योग के भीतर उपयोग किए जाने वाले आवश्यक तत्व भी होते हैं।
इन्हे गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत भी माना जाता है क्योंकि इन्हे बनाने में लंबे समय की आवश्यकता होती है।
जीवाश्म ईंधन के निम्नलिखित लाभ हैं।
1.जीवाश्म ईंधन एक ही स्थान पर बड़ी मात्रा में बिजली उत्पन्न कर सकते हैं।
2. उन्हें बहुत आसानी से पाया जा सकता हैं।
3. इनकी लागत कम होती हैं।
4. पाइपलाइनों के माध्यम से तेल और गैस का ट्रांसपोर्टेशन आसानी से किया जा सकता हैं।
5. यह समय के साथ सुरक्षित हो गए हैं।
6. सीमित संसाधन होने के बावजूद यह प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।
जीवाश्म ईंधन के निम्नलिखित नुकसान हैं।
1. कोयले और पेट्रोलियम के जलने से बहुत सारे प्रदूषक पैदा होते हैं, जिससे वायु प्रदूषण होता हैं।
2. जीवाश्म ईंधन कार्बन, नाइट्रोजन, सल्फर आदि के ऑक्साइड छोड़ते हैं, जो अम्लीय वर्षा का कारण बनते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरता और पीने योग्य पानी प्रभावित होता हैं।
3. जीवाश्म ईंधन के जलने से कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसें निकलती हैं जो ग्लोबल वार्मिंग का कारण बनती हैं।
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