आनुवंशिक विकारों से क्या तात्पर्य है ? उस गुणसूत्र के प्रकार का नाम बताइए जिस पर हीमोफीलिया तथा रंगांधता के दोषपूर्ण जीन स्थित होते हैं । हीमोफीलिया तथा रंगांधता प्रायः लडकों में ही क्यों पाई जाती है , लड़कियों में क्यों नहीं ? व्याख्या कीजिए ।
आनुवंशिक विकारों से क्या तात्पर्य है ? उस गुणसूत्र के प्रकार का नाम बताइए जिस पर हीमोफीलिया तथा रंगांधता के दोषपूर्ण जीन स्थित होते हैं । हीमोफीलिया तथा रंगांधता प्रायः लडकों में ही क्यों पाई जाती है , लड़कियों में क्यों नहीं ? व्याख्या कीजिए ।
जीन सभी लक्षणों को नियंत्रित करती हैं । कभी - कभी किसी जीन का युग्मक या युग्मज में बदलाव उत्परिवर्तन आ जाता है । उत्परिवर्तित जीन सामान्य नहीं रह सकती । इसके अलावा कभी - कभी जनक में मौजूद कोई दोषी जीन की अभिव्यक्ति नहीं होती क्योंकि दोषी जीन की अभिव्यक्ति उसके जोड़े के दूसरे सामान्य जीन ने दबा छिपा रखा हो । परंतु हो सकता है कि संतान में प्रत्येक जनक से वही एक - एक दोषी जीन पहुंच जाये और दोषी जीन की जोड़ी की उपस्थिति से एक हानिकारक प्रभाव आ जाए । इस तरह के विकार को वंशानुगत या आनुवंशिक विकार कहा जाता है ।
सामान्य आनुवंशिक ( वंशानुगत ) विकार आनुवंशिक ( वंशानुगत ) विकार कई हैं । सामान्यतः पाये जाने वाले तीन वंशागत दोष हैं थैलेसीमिया , हीमोफीलिया और रंगान्धता
(i) हीमोफीलिया - हीमोफीलिया से पीड़ित रोगियों में या तो केवल एक ही जीन दोषी है या वह जीन जो रक्त के स्कंदन को नियंत्रण के लिये जिम्मेदार पदार्थ का उत्पादन करती है , की कमी होती है । ऐसे पदार्थ के अभाव में रक्त का स्कंदन नहीं होता है । एक बार रक्त बहना शुरू हो जाय तो वह आसानी से बहना बंद होता है ।
(ii) रंगांधता - अनेक प्रकार की रंगांधता पाई जाती हैं । परंतु इस विकार के सबसे सामान्य रूप में एक व्यक्ति हरे और नीले रंग में भेद नहीं कर पाता । यह भी एक दोषपूर्ण जीन की उपस्थिति या रंग दृष्टि के लिये जिम्मेदार जीन की अनुपस्थिति के कारण होता है ।
हीमोफीलिया और रंगांधता दोनों में ही दोषपूर्ण जीन एक्स ( X ) गुणसूत्र पर स्थित है । और इसलिये विकार मां से बेटे को पारित हो जाता है । क्योंकि बेटा x गुणसूत्र मां से और Y गुणसूत्र पिता से प्राप्त करता है । मां में दो x गुणसूत्र के कारण दोष दिखाई नहीं देता । इसके अतिरिक्त बेटी में एक x गुणसूत्र मां से विरासत में मिला दोषपूर्ण जीन के साथ होता है परन्तु वह पिता से प्राप्त x गुणसूत्र के सामान्य जीन के प्रभाव से ढक जाता है । क्योंकि दोषपूर्ण जीन x गुणसूत्र पर स्थित है , बेटा आनुवंशिक विकार से ग्रस्त होता है । क्योंकि नर में केवल एक x गुणसूत्र और एक Y गुणसूत्र है इसलिये दोष पूर्ण जीन ढकी नहीं जा पाती है ।
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