कार्बन के तीन सूक्ष्म स्फटीय रूपों के नाम बताइए। इनका निर्माण कैसे होता है ? प्रत्येक रूप का एक - एक उपयोग लिखिए।
कार्बन के तीन सूक्ष्म स्फटीय रूपों के नाम बताइए । इनका निर्माण कैसे होता है ? प्रत्येक रूप का एक - एक उपयोग लिखिए।
पृथ्वी पर पाए जाने वाले तत्वों में कार्बन या प्रांगार एक प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण तत्त्व है। इस रासायनिक तत्त्व का संकेत C तथा परमाणु संख्या 6, मात्रा संख्या 12 एवं परमाणु भार 12.000 है।
कार्बन के तीन सूक्ष्म स्फटीय रूप हीरा, ग्रेफाइट, फुलेरीन है.
1. हीरा - हीरा पृथ्वी के अंदर उच्च तापमान ( 1500 ° C ) और उच्च दाब ( लगभग 70,000 वायुमंडल ) की स्थिति में बनता है । एक हीरे के क्रिस्टल में प्रत्येक कार्बन परमाणु चार अन्य कार्बन परमाणुओं से चतुष्फलकीय व्यवस्था में सह - संयोजक आबन्ध द्वारा जुड़ा हुआ है ।हीरे का उपयोग -
i. यह कठोर और अन्य सख्त पदार्थों के काटने और पीसने के लिये प्रयोग किया जाता है ।
ii. यह काँच काटने और चट्टानों में छेद करने के लिये प्रयोग किये उपकरणों में लगाया जाता है ।
iii. यह ज्वेलरी में प्रयोग किया जाता है । हीरे से सुंदर गहने बनाये जाते हैं । अपने उच्च अपवर्तक सूचकांक के कारण जब इसे अच्छी तरह काट कर पालिश करते हैं तो यह अत्यधिक चमकदार बन जाता है ।
2. ग्रेफाइट - हीरे के विपरीत , जिसमें कार्बन के परमाणुओं की त्रिआयामी चतुष्फलकीय व्यवस्था थी, ग्रेफाइट में कार्बन परमाणु की परते होती हैं । हर परत में कार्बन का एक विशेष परमाणु 120 ° के एक मोड़ कोण के साथ तीन अन्य परमाणुओं के साथ त्रिकोणीय प्लानर व्यवस्था में जुड़ा हुआ है । इस प्रकार कार्बन के तीन इलैक्ट्रान , कार्बन के तीन अन्य परमाणुओं के साथ सह - संयोजक आबंध द्वारा जुड़े हैं । चौथा इलेक्ट्रान जो आबंध में भाग नहीं लेता है मुक्त है । विभिन्न कार्बन परमाणुओं के यह इलेक्ट्रान परतों के बीच स्थानान्त्रण करने के लिये स्वतन्त्र है अतः विद्युत संचालन में सक्षम हैं ।
ग्रेफाइट का उपयोग -
i. यह मशीनों के चलते कल पुर्जो जो तेज तापमान पर कार्य करते हैं और जहाँ अन्य साधारण तेल स्नेहक का प्रयोग नहीं किया जा सकता के लिये सूखे स्नेहक के रूप में प्रयोग किया जाता है ।
ii. यह शुष्क सेल और विद्युत आक्स में इलेक्ट्रोड बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है ।
iii. यह पेंसिल का सुरमा बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है । क्योंकि अपनी कोमल प्रकृति और स्तरित संरचना के कारण यह कागज पर काला निशान छोड़ देता है । इसलिये यह पेंसिल में सुरमा के रूप में लिखने के लिये प्रयोग किया जाता है ।
iv. यह धातुओं को पिघलाने के लिये प्रयुक्त पात्र बनाने के लिये प्रयोग किया जाता है ।
3. फुलेरीन - फुलेरीन की एक फुटबाल की तरह बंद संरचना होती है । बकमिन्सटर फुलेरीन नामक एक प्ररूपी फुलेरीन में 60 कार्बन परमाणु होते हैं. निष्क्रिय गैस के वातावरण में वाष्पित कार्बन सघनित होने पर फुलेरीन का निर्माण होता है ।
यह सामग्रियों को उच्च कोटि के संचालक, नई उत्प्रेरक और पॉलिमर आदि के रूप में उपयोग किया जाता है । यह लकड़ी का कोयला , कोक और कार्बन ब्लैक हैं ।
Nios Science And Technology (212)
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